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मैत्री भाव का पावन झरना मैरे ह्रदय में बहा करे, सम्पूर्ण विश्व में सर्व शुभ हो, ऐसी भावना नित्य रहें

गुण से भरे गुणिजन को देख, हृदय मेरा नाच उठे, ऐसे संतों के चरण कमल में,जीवन नत मस्तक रहे।

दीन, दुःखी और धर्मरहित, क्या हृदय में दर्द रहे, करुणारत नयनों में से, अश्रु का शुभ स्रोत बहे।

मार्ग भटके जीवन पथिक के, पथ प्रशस्त में तत्पर रहुँ , करे उपेक्षा जो इस मार्ग की, उनको सत्य प्रतिबोध कहुँ ।

वीर प्रभु की धर्म भावना, मनुज मन में लाना है, वैर, जहर के पाप त्याग कर, मंगल गीत गाना है ।

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